कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम में पड़ी औरतें

प्रेम में पड़ी औरतें ...... खुले बंद केशों में आधी मूंदी आँखों वाली चिपके सिले अधर लिए टूटी फूटी लकीरों से सूखी गहरी बिवाइ पड़ी एक अधूरी अनसुनी मौन प्रार्थना भर हैं जिसमें.... दिशा देश दूरी देव दायरा देह सब नाम भर के शब्द हैं। गिरवी रखी सफ़ेद तितलियां हों जैसे..... पंखों में गीला नीला प्रेम पोते हुए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें