कल्पनाशब्दों के बीच
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समझदार होने और बड़े होने में बस कहन का ही अंतर नहीं मनन का…

समझदार होने और बड़े होने में बस कहन का ही अंतर नहीं मनन का भी अंतर है। इन अनुभूतियों का उम्र से कोई लेना देना नहीं। शिशु भी जीतता है रण अगर देख सको उसकी ओर कुछ पल रुककर । हार बड़े भी जाते हैं इक सादी सी जंग । *तस्वीरें fb से मिली हैं। मुझे ज़िंदगी दिख रही इनमें ।आप देखिए तो..
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें