कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3244

भाषा / Language

हल्की सी अजनीबियत रहने देना दरमियाँ

हल्की सी अजनीबियत रहने देना दरमियाँ.... कभी रूठे तो मनाने के काम आएगी सुनो.... तुम्हारा नाम क्या है कहने के काम आएगी😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें