भाषा / Language
जहां -जहां कुछ - कुछ छूटा सब सुंदर रहा
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जहां -जहां कुछ - कुछ छूटा सब सुंदर रहा...
मेरा.....सुंदर
माथा,आँखें,अधर,गाल,ठोड़ी ,अधपके केश,गर्दन ,कांधा,अंतस,बांहे,हथेलियाँ,गोद ,नूपुर,मैं ,तुम
तुम्हारा .....जो छूट गया
बोसा,इशारे,चुप्पी,ओस,मनका,
पारिजात, भूरे-भूरे चकत्ते, पल,रूह,आगोश,तसल्ली,सर,चाप,
तुम ,मैं
मेरे हिस्से को तुम्हारे से एक एक कर मिलाया तो हर बार मन में एक कविता छूटी ।
इक कोरा कागज़ छूटता रहा।
मेरे इश्क़ में इबादत छूटी
मेरी इबादत में एक चेहरा
मेरे चेहरे में तुम
तुम में मेरा इश्क़ छूटा
सब छूटा हुआ कितना तो सुंदर रहा💐
*कल आवाज़ औऱ मुस्कान का मिलन देखा तो खनक अभी तक है।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें