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ज़िन्दगी सुख दुःख से भरा एक पत्ते का सकोरा
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ज़िन्दगी सुख दुःख से भरा एक पत्ते का सकोरा
ये दुःख *ग * पर लगी बड़ी मात्रा
ये सुख *ज* पर लगा नुक्ता भर
एक अहद पर लगी शिरोरेखा जो खत्म नहीं होती पर कहीं जाती भी नहीं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें