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इस धरती पर कितने तो प्यारे लोग हैं

इस धरती पर कितने तो प्यारे लोग हैं.... प्रेम तुम पर रुका है। इस पंक्ति में जितना हिस्सा ख़्वाब है उतना ही हिस्सा रात है। उजास बस इस पंक्ति को लिखने भर का ....महसूस करने भर को है। इस पल तुम क़ैद हो मेरे पल में। एक वीरानगी की ओर बरसों से देख रहीं हूँ। तुम नज़र तो नहीं आते पर बनते जाते हो मुझमें। * मन बाज है और बाज बाज़ नहीं आता। *तस्वीर में किसकी तस्वीर देख रही हूँ ये सिर्फ़ तुम बता सकते हो।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें