भाषा / Language
वर्षों से खुद से दूरी पर खड़ी हूँ।
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वर्षों से खुद से दूरी पर खड़ी हूँ।
दो औरतों के बीच खुद को चुन लेना एक जोख़िम भरा काम है।
तुम राह सुगम कर दो।
एक चुन लो।
दूजी *चुन* दो।
* इस हूर को पढ़ो तो अजीब अजीब से ख़्याल आते हैं। लगता है एक उजाड़ जगह से गुज़र कर आई हूँ पर महक रहीं हूँ मैं।
पृष्ठ 54 से पृष्ठ 57 में चैप्टर *सिर्फ़ औरत * है।
4 पन्नों से बनी ......एक पूरी दुनिया
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें