कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 3159

भाषा / Language

तुमको पढ़ती हूँ तो लगता है घुल गई हूं।

तुमको पढ़ती हूँ तो लगता है घुल गई हूं। चुप्पी और उदासी का घोल आओ तुम्हें शाम पे ले जाएं😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें