तुमको पढ़ती हूँ तो लगता है घुल गई हूं। चुप्पी और उदासी का घोल आओ तुम्हें शाम पे ले जाएं😊
रचना 315918 अक्टूबर 2021भाषा / Languageहिन्दीEnglishतुमको पढ़ती हूँ तो लगता है घुल गई हूं।✦तुमको पढ़ती हूँ तो लगता है घुल गई हूं। चुप्पी और उदासी का घोल आओ तुम्हें शाम पे ले जाएं😊कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें