कल्पनाशब्दों के बीच
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मुझे पसंद हो तुम ऐसे ही

मुझे पसंद हो तुम ऐसे ही... तुम मुझे कुछ नहीं कहते ...बताते बहुत कम बात होती है हमारी ना के बराबर सच कहूँ.... everyday I learn ,unlearn and relearn love. याद आने और याद करने के बीच एक बालिश्त भर की ही दूरी रखी है हमने ..जिसमें कौन और कब नहीं है बस कैसे है?वो भी अदृश्य Love for me has been always flying alone. Flying alone in your sky. Love for you is watching me fly in your sky. You open your horizons for me.... I feel so... I know so... हम साँझा हैं...इसको बताने के लिए कोई way of expression नहीं रखा हमने .... बस हैं। आना जाना ....रह जाना जैसा ही है। मैं आती हूँ... तुम आने देते हो। मैं जाती हूँ... तुम जाने देते हो। हमारे बीच दहलीज़ ही नहीं रखी तुमने। शुक्रिया हमेशा रहेगा। प्रेम के पंख बचाये रखेंगे हम चुप्पी में दबाए हुए। *तस्वीर एक पहाड़ी लड़की की है जिसे एक पहाड़ चुपके चुपके प्रेम करता है। 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें