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तावीज़ और मन्नत का अंतर जानती हो ...उसने पूछा।

तावीज़ और मन्नत का अंतर जानती हो ...उसने पूछा। हाँ एक में से भी तुम निकल जाते हो ... तो बस धागा रह जाता है। बस वही मन्नत है मैंने मुस्कुराते हुए कहा बंधे मन खुल न पाएं कभी😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें