भाषा / Language
ज़िन्दगी साफ़ शब्दों में ही लिखी होती है ... पूरे अर्थ के साथ।
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ज़िन्दगी साफ़ शब्दों में ही लिखी होती है ... पूरे अर्थ के साथ।
हम अक्षर से अक्षर मिलाने में लगे रहते हैं।
जब तक पढ़ना सीखते हैं , बोलने की उम्र सरक जाती है ।
जब बोलना आने लगता है तो अंदाज़ा लगता है कि सुनना तो सीखा ही नहीं।
सुनने की कोशिश में याद रखना याद नहीं रहता।बस इसलिए लिखना रह जाता है।
ज़िन्दगी अनगढ़ लगती है
और हम..
निपट अनपढ़
एक पूरा गंवार शब्दकोष हैं हम
सिर्फ एक शब्द
"ज़िन्दगी " गुदवाए हुए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें