भाषा / Language
जिस रोज़ बहुत कुछ कहने का मन हो और आप कहने के लिए शब्द नहीं…
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जिस रोज़ बहुत कुछ कहने का मन हो और आप कहने के लिए शब्द नहीं कुछ अक्षर ढूंढ रहे हो ... तो यकीनन आप प्रेम में नहीं प्रेम को खो देने के डर में हो।
समंदर को बूंद से समझाना मुश्किल है।
बेहतर है ....
बरसो बारिश सा
बहो नदी सा
रुको तालाब सा
हो जाओ कुएं सा
या फिर ....
सबसे बेहतरीन है..... उड़ जाओ भाप सा
ये समंदर ... तृप्त है
तुम्हें नहीं समझेगा।
तुम तो समझ जाओ......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें