भाषा / Language
धुआँ.... धुआँ
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धुआँ.... धुआँ
किसी को किसी में ढूंढ लेना प्रेम की बुरी आदत है।
वो कितना भी उसका नाम "क " से शुरू करना चाहे वो हमेशा "अ" से ही शुरू हो सकता था
"अभिमन्यु" .....तुम्हें देख कर कोई भी कह सकता है कि तुम एक साथ बहुत सारे लोगों को खुश रखने में माहिर हो। इतनी कहानियां कैसे और कहाँ ढोते हो?
नैना ने अपने रेशमी बालों को ऊन के गोले सा कर दिया।
अभिमन्यु की नज़र किताब के बावनवे पेज से उठी तो नैना की झूलती लट पर टिक गयी। उसके जी में आया कि कहे नैना बस एक पल तुम आंखें बंद कर लो मैं तुम्हें चूमना चाहता हूँ ।
"just freeze नैना "
उंगलियों में कलम नचाते हुए बेहद करीब आकर नैना के कानों में वो फुसफुसाया ....दिलबर यूँ कहानियाँ कैद न किया करो और उसी पेन से उसने बंधा ऊन का गोला रेशा रेशा कर दिया।
नैना ने सब कुछ सुना बस "दिलबर " सुनकर भी अनसुना कर गयी।
ओहहो ! यानी जिस तरह खूबसूरती रोकी नहीं जा सकती... वो सरकती रहती है। ठीक वैसे ही कहानियाँ भी नहीं रुकती क्या "अभी" ? नैना चहक कर बोली
अब इसका क्या जवाब देता अभिमन्यु । अपनी कुछ देर पहले की गुस्ताखी को छिपाने के लिए उसे जेब में रखी सिगरेट सुलगानी पड़ी। धुआं लाख रोकने पर भी नैना की तरफ ही जा रहा था ।बेसब्रा कहीं का।
और सारी राख पास रखी किताब से यारियां बढ़ा रही हो जैसे।
नैना ये धुआं देख रही हो .... ये कहीं नहीं जाता अगर कैद कर के रखना चाहो तो ।ठीक वैसे ही ये कहानियां भी।
अच्छा ये बताओ धुआं लिखा है कभी? नैना ने "अभि" की सांस लेती सिगरेट ऐशट्रे से उठाकर अपने होठों पर धर दी। कश दिलकश भी होती है ये अभिमन्यु ने आज ही देखा था।
कलम से कुछ देर की बातें पास रखे कागज़ पर नैना लिख कर बोली ....
लो तुम्हारा धुआं वापस कर रही। फिर मिलूंगी अगली बार "क" से कविता लाती हूँ ।
उस रोज़ अभिमन्यु सिर्फ़ "न " से नैना सुनता रहा देर रात तक .....
नैना का कागज़ सामने नीले बोर्ड पर मुस्कुरा रहा था।
प्यारे अभी.....
"उनके आसपास और शायद दरमियाँ भी ढ़ेर सारा धुआं जमा रहता।वह उसे कहानियों में भर लेता और वो उसे नज़्मों में काढ़ लेती। अब उनके बीच कई पुल हैं...वो भी धुआं धुआं
या शायद फिर एक बार कहानियों में आज बरसों बाद नज़्म गुम है और हर नज़्म में फिर एक मुकम्मल कहानी ।
कागज़ पर धुआं लिखना कितना आसान है पर प्रेम को रोके रखना कितना मुश्किल...
तुम्हारी अलबेली
नैना
अभिमन्यु मुस्कुराया और उसी कागज़ की आखिरी बची कुछ ख़ाली जगह पर ये लिख कर सो गया...
"अभी और नैना के बीच "क " वाली कहानी रुक जाए काश।"
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें