भाषा / Language
अंतर है
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अंतर है ....
तुम खुले दरवाज़ों पर भी दस्तक नहीं देते l
मैं बंद दरवाज़ों पर भी अपनी अर्जी धर आती हूँ l
अच्छे लगते हो .... रुके हुए मुझमें
एक तुम ...
और एक ये चाँद
शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें