कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3008

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अंतर है

अंतर है .... तुम खुले दरवाज़ों पर भी दस्तक नहीं देते l मैं बंद दरवाज़ों पर भी अपनी अर्जी धर आती हूँ l अच्छे लगते हो .... रुके हुए मुझमें एक तुम ... और एक ये चाँद शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें