कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3006

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दिन भर खर्च करती हूँ

दिन भर खर्च करती हूँ ...... रात तक फिर जमा हो जाता है प्रेम भी मेरे शब्दों सा मायावी हो चला है।😊😊😊 शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें