कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 3005

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सबके पास एक नाम होता है जिसे मिटाने का मन ही नहीं होता ।वो…

सबके पास एक नाम होता है जिसे मिटाने का मन ही नहीं होता ।वो भूल में भी याद रहता है। दो होठों के बीच एक बूंद निर्वात प्रेम बस इसे कहते हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें