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रचना 3004

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रूठ कर ज़ाया हो जाने से बेहतर है मुस्कुराकर खर्च हो जाना।

रूठ कर ज़ाया हो जाने से बेहतर है मुस्कुराकर खर्च हो जाना। ज़िन्दगी बनी रहती है। अब तुमको कभी आवाज़ नहीं दूँगी। रास्तों पर खुद पत्थर रख आई हूँ। हर राह मिटा दी है..... कुछ दिन गुम होकर देखती हूँ । तुमसे 😊 दुआएं सदा।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें