कल्पनाशब्दों के बीच
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बेबाक़ इश्क़ दिख जाता है

*बेबाक़ इश्क़ दिख जाता है.... कल्पना ...ये चुप्पी ओढ़ लो.... झट ....छिप जाता है। *उसने पतझड़ का मौसम मेरे लिए मुकर्रर किया है.... नवाजिशें हैं... उसकी तुम क्या जानते हो मेरे फूल के बारे में l *दो अलग अलग दरख्तों पर एक मुहब्बत खिली है.... उसे देख लो चाहे... मुझे देख लो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें