कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2910

भाषा / Language

अपने मन में इततु सी जगह तो खाली रखनी ही चाहिए......ताकि तुम…

अपने मन में इततु सी जगह तो खाली रखनी ही चाहिए......ताकि तुम जी भर भरे रह सको।😊 हर मन का अपना एक हिस्सा किसी का नहीं होता सिवाय अपने। उस हिस्से में एक चेहरा और उसको बना देने वाली संवेदना रहती है। कुछ आधे-अधूरे संवाद कुछ कच्ची -पक्की हँसी एक लंबी प्रतीक्षा कुछ छोटी मुलाकातें और एक अनहद उदासी इस हिस्से की द्वार और दीवार होते हैं। बिना झरोखे का ये हिस्सा दिन भर कई महल बना कर धराशायी करता रहता है। हम खुरचन और खरोंचों से प्रेम लिखना कभी नहीं छोड़ते। इनकी रंगत गहरी मेहंदी सी सुर्ख होती है। इस हिस्से को नज़र नहीं लगनी चाहिए।😊😊 बजरबट्टू टांग दो।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें