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तुम्हें गुम नहीं होना चाहिए

तुम्हें गुम नहीं होना चाहिए.... मैं दो चाँद तो संभाल सकती हूँ एक रात में दो दो रातों की उदासी पी नहीं सकती। रो पड़ने के लिए आँसू नहीं.... ढ़ेर सारा मन चाहिए बस वही धोखाधड़ी कर देता है। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें