कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2900

भाषा / Language

दो अजनबी

दो अजनबी .... साथ .....दो कप कॉफ़ी "शब्दों "से भरी बीच हमारे ....इक दरिया आँखों के रास्ते दिल सोखता हुआ इक इक फ़ाँक खुद अपनी ..... इक दूजे की हथेली में धरने की ख्वाइश दो बूँद लम्हों में कह जाने..... और खो जाने की आजमाइश वो मुलाक़ात..... "अधूरी "ही पूरी हुई कॉफ़ी के ......दो खाली कप मुस्कुराते रहे...... देखते रहे .... हमें जाते हुए कुछ "शब्दों का स्वाद " तेरे मेरे लबों पर चिपका रहा अगली मुलाक़ात की ... तारीख बुनता रहा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें