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तुम्हें बादलों की ओट में ही रखूँगी

तुम्हें बादलों की ओट में ही रखूँगी... मुझे चाँद वैसा ही पसंद है। *बेचैनियाँ ही ठीक थी .... कम से कम होती तो थी।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें