भाषा / Language
लौट कर आने के लिए कविता से खूबसूरत बाहें नहीं
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*लौट कर आने के लिए कविता से खूबसूरत बाहें नहीं .....
*बाक़ी रहने की बात थी.....
तुमने मुझे उदासी दी...
मैं उस पर भी झरोखा लिख आयी।
तुम को किसी हाल खो नहीं सकती।
तुम मुझमें मेरा ही बाक़ी हो।
*तुमसे गर गुफ़्तगू हो भी गई तो क्या कहूँगी ....
पहले आप ... फिर तुम... कभी तू भी कहूँगी ।
*दिमाग तह कर रख चुकी हूं ...मन का लिहाफ़ खोल दिया है।
मैं सेमल के फाहे सी खुद पर गिर रही हूँ।
मन को मनाना आसान है। बस मन होना चाहिए। मेरे पास तुम्हारे लिए बहुत है।
💐💐💐💐
तस्वीर रोज़ एक सी रहती होगी आप सब के लिए।पर मेरे लिए पूरा एक दिन एक रात बीत कर नया बन जाने वाली बात है। वक़्त को ठेंगा दिखाने वाली बात है। 😊😊😊
मैं बीत रही... आप भी बीत रहे होंगे।
अच्छे रहना💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें