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मेरे लिए काला जादू कुछ नहीं होता

मेरे लिए काला जादू कुछ नहीं होता.... स्लेटी होता है.... सफ़ेद मिला हुआ *तस्वीर सुबह 5 बजे योगा करते वक़्त उस पेड़ की है जो अभी भी ठीक मेरे ऊपर पड़ रहा है। रंगों को घोलने का काम धुँध कर देती है। 😊 तुम मेरी धुँध मेरा सफ़ेद हो हमेशा से। पहाड़ों में स्लेटी जादू होते हैं और ये होते ही रहते हैं...मौसम बेमौसम मन हर समय चलता रहता। जैसे फ़ोन पर ये उंगलियाँ 😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें