भाषा / Language
मेरे पास दुनिया की सबसे उदास धुन थी
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मेरे पास दुनिया की सबसे उदास धुन थी.....
उनके पास दुनिया के सबसे हसीन उजास
हमारा मिलना तय था ....
*मैंने फूलों से पूछा क्या तुम मेरे हिस्से का भी हँस सकते हो?आज मन नहीं...
फूलों ने कहा हँस तो देंगे पर कल तुम कहोगी मेरे हिस्से का कह भी लो
फिर कहोगी जी भी लो...
ऐसे कैसे चलेगा कल्पना?
मन को मनाओ ....
कह लो मुझसे मन।
पड़ जाओ मेरी प्रीत में
मेरे रंग तुम्हारे
मेरी लर्जिश तुम्हारी
बिना थके दुःख बीनती रहो.... एक दिन पता भी नहीं चलेगा और सुख ही सुख रह जाएंगे।
तब तक मुस्कुराओ....
मेरी तरह।
*फूल मेरे घर के आसपास लगे हैं ।तस्वीर में मेरा बेचैन मन है पर आप सब के लिए दुआएं ढेर भी हैं। सब अच्छे रहना।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें