कल्पनाशब्दों के बीच
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तुमको मन दूँगी

तुमको मन दूँगी.... मन की धड़कन भी दे दूँगी.... पर उसका rhythm अपने पास रखूँगी। मुझे आवारगी अपने किस्म की पसंद है। पैरों में सौ नूपुर हों पर ध्वनि एक न हो । दे सकते हो? दे सकते हो ये rhythm? ये सुकून? शुभरात💐 मन अशांत है ... पर लिखने के लिए उंगलियों में हरारत बाक़ी है। मन में रोड़ा अटका है। जाने कब निकलेगा। आस पास रहो कि जाने कब साँस उचके ....कब नींद बिखर जाए। अच्छे रहना। 💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें