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आज अल्मोड़ा में पूर्ण lockdown है।पर मेरा आज वैक्सीन का seco…

आज अल्मोड़ा में पूर्ण lockdown है।पर मेरा आज वैक्सीन का second doze due था तो मैं और विनोद पैदल -पैदल बाज़ार अस्पताल चले गए। बाजार से मेरा घर करीब तीन चार km ही होगा। ये देख कर खुशी हुई कि छोटे शहरों में नियम बेहद अच्छे से पालन हो रहा था...सारा मतलब सारा कुछ बंद। दो चार दवाइयों की दुकान खुली थी। सारा रास्ता शांत। कोई हलचल नहीं। इक्का दुक्का गाड़ियां और कुछ एक लोग दिख रहे थे। रेडक्रॉस की गाड़ियों से announcement हो रही थी।रामज़े स्कूल में वैक्सीन की सुंदर व्यवस्था थी। 5 मिनट में वैक्सीन लग गयी। कोई भीड़ भाड़ नहीं। छोटे शहरों के अपने सुख हैं। दिल्ली में तो हाल बुरा ।विनोद को पूरे तीन घंटे लगे सेकंड डोज़ जिस दिन लगवाने गए। यहां 2 दिन सब घर में बंद हो गए हैं। रोग यहां भी है ही पर बचाव अपने हाथ है। करना ही पड़ेगा। बाकी घर वालों से हम भी यहां quarantined हो गए हैं । सारा प्रेम दूर दूर से रखो।नियम ताक में नहीं। यहां इस बात का सुकून है कि हवा तो कम से कम शुद्ध है और चिड़िया कोयल की आवाज़ है। फूल पत्ते आसमान ...ये प्यारे नज़ारे हैं।ये काफ़ी हैं मेरे लिए।दिल्ली में तो मुझे उदासी ने घेर रखा था। रास्ता पूरा ख़ाली था तो विनोद ने कुछ तस्वीरें ली हैं ।शायद अल्मोड़ा का असर है। 😊😊 पैदल रास्ता तस्वीर लेने और बातें बनाने में कट गया। तस्वीरें साँझा कर रही हूँ...
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें