भाषा / Language
ये जाने कौन है
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ये जाने कौन है?
मेरे घर से कुछ 1 km दूर ये यहीं रहते हैं। दिन हो या रात
मैं तो जब भी अल्मोड़ा आती हूँ इनको यहीं बैठा लेटा देखती हूँ।
आज बाज़ार को जाते वक्त तो ये बैठे थे पर लौटने पर ये बेफिक्री में थे।
तस्वीर में आप इनकी आवारगी ....इनकी बेफिक्री....इनका सुकून देख नहीं पाएंगे। मैंने बहुत पास से आज देखा।
विनोद से कहा सुनो....ये कितनी निश्चिन्तता जी रहा। इसके पास कोई फ़िक्र होगी क्या?
क्या है जो कोई ले जाएगा। खोना पाना सब इसी वक्त है इसके पास।
कौन सा कोरोना
कौन सा रोग।
कौन सा सुख
कौन सा दुख।
कौन सा साथ
कौन जुदा।
पेड़ की जड़ों में जड़ से जुड़ा हुआ।
*विनोद ने मेरे लिए इसकी तस्वीर ली और कहा देखना कुछ साल बाद लोग कहने लगेंगे यहां पर एक बाबा रहते थे। आस्था को कोई प्रमाण कहाँ चाहिए।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें