भाषा / Language
मुझे पता नहीं ये कितनी सच्ची ख़बर है
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मुझे पता नहीं ये कितनी सच्ची ख़बर है....
पर अगर है तो ईश्वर खुद आगे आ रहे अब।
काश हर राज्य के वहां के भव्य मंदिर अपना खज़ाना मानवता को बचाने में खोल दें। इससे बड़ा सबक और उद्धार क्या होगा। ऐसा होना चाहिए ।
रोग हम पर इंसानी है.....
पर ईश्वर तेरी हम पर निगरानी है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें