कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2787

भाषा / Language

हम दो बेमेल लोग हैं ।

हम दो बेमेल लोग हैं । हम शायद ही कहीं मिलें पर रोज़ मिलने की खूबसूरती को रच सकते हैं। इस जादू के हो जाने तक हम एक दूसरे के साथ न होने को नकारते रहेंगे। हम दो बेमेल लोग... दुआ करते हुए प्रेमी दिखेंगे। इतने साल..... पिघल गए हमारे दरमियाँ "उस बार" की बर्फ पिघलाएं नहीं पिघली कल्पना💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें