कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2780

भाषा / Language

उसे पता है मेरी पहुँच नहीं है उस तक

उसे पता है मेरी पहुँच नहीं है उस तक वो हवाओं को पता बता कर रखता है। वो जानता है इश्क़ फिज़ूल शे है वो दिल में दो ही पत्ते दबा कर रखता है। मैं इश्क़ इश्क़ प्यार प्यार करती हूँ वो मुआ उधर फासला बढ़ा कर रखता है जानती हूँ अकेले में चोटी खींच लेगा वो जो आगे से मुँह सूजा कर रखता है। जी में आए तो हँस कर चूम भी ले वो मेरी तस्वीर से मस्त बना कर रखता है। मुझे क़ासिद से भला क्या गिला करना वो ग़ज़ल में मेरे ख़त दबा कर रखता है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें