कल्पनाशब्दों के बीच
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ऐ रंगरेज़ मेरे

ऐ रंगरेज़ मेरे .... ये कौन से पानी में तूने कौन सा रंग घोला है... जिगर रंग दे.... रंगों का कारोबार है तेरा.... मेरे आठों पहर मनभावन रंग.... एक बूंद इश्किया डाल कोई .... नींदे रंग दे... सलवट रंग दे... तू आ न सके तो फ़ुर्सत रंग दे। मैं ज़िंदा रहूँ....हसरत रंग दे। तेरी हर बात सर आँखों पर... तेरे बिना मैं जाऊं कहाँ.... जाऊं कहाँ ? *आप भी सुनें.... मेरी सुबह की झूम😊😊😊 Enjoy your solitude....never let it end.💐💐💐 smile ....smile alone
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें