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मैंने कब कहा तुम मुझसे फूल चुनना

मैंने कब कहा तुम मुझसे फूल चुनना .... मैंने हमेशा कहा ....तुम मुझसे मेरे कांटे निकाल देना। उस झाँक का इंतज़ार है। * आंखों पर नीले रंग का लाइनर है ....चश्मा है..... मुस्कान है.... पर उदासी का रंग पनियल ....सब पर भारी है।छुपाए नहीं छुपता।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें