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कितने दफ़े दिल ने कहा

कितने दफ़े दिल ने कहा दिल की सुनी कितने दफ़े वैसे तो तेरी ना में भी मैंने ढूँढ ली अपनी ख़ुशी तू जो अगर हाँ कहे तो बात होगी और ही दिल ही रखने को कभी, ऊपर-ऊपर से सही कह दे ना हाँ, कह दे ना हाँ यूँ ही ये गीत जितनी बार भी सुनती हूँ... उतनी बार मुस्कुराती हूँ😊😊 आप भी सुनिए....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें