भाषा / Language
नगाड़े होंगे.... तुम नाच नहीं पाओगे
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नगाड़े होंगे.... तुम नाच नहीं पाओगे
बाहें होंगी....तुम समा नहीं पाओगे
हिम्मत होगी ....तुम दे नहीं पाओगे
दुःख होगा ....तुम जला नहीं पाओगे।
सोच होगी .... तुम सच नहीं कर पाओगे
कभी
हम ऐसे असहाय होंगे
सोचा न था
सीखने का वक़्त है...
लाठी की मार खा लो और
नए बन जाओ
सुनो....
इस बार लाठी पीठ पर नहीं अंतस को लगनी चाहिए।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें