भाषा / Language
तुम्हारी स्मृतियाँ मेरे एकांत के प्रेम में पड़ गयी हैं
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तुम्हारी स्मृतियाँ मेरे एकांत के प्रेम में पड़ गयी हैं...
मुझे चूम कर उसे ध्वनित करती हैं।
खुद में एकाकी होना अनुभूति और अभिव्यक्ति को हवा देता है
मुझ में दो स्पंदन एक साथ होते हैं....मेरा और तुम्हारा
हमेशा कहती हूँ...
दिल के किस्से कहाँ नहीं होते ....
कभी यहां नहीं होते
कभी वहां नहीं होते
😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें