कल्पनाशब्दों के बीच
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हम अंतराल में जीने वाले लोग हैं।

हम अंतराल में जीने वाले लोग हैं। एक बेहद अलग दुनिया... विराम से बस जरा देर पहले वाली। आजकल उस अंतराल को भी घुन लग गया है खूब ख़्याल रखिये। समय बोझिल है पर खिसकेगा। साथ बने रहिये। अपने परिवार का ख्याल रखिये। ये दिन भी बीत जाएंगे। हौसला रखिये। शुभरात💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें