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खूबसूरती खूबसूरत होने में नहीं इसका खूब बचा कर रखने में है…

खूबसूरती खूबसूरत होने में नहीं इसका खूब बचा कर रखने में है। खूबसूरती खूब में है। खूबसूरती अगर मेरी है तो इसे असल में मेरा ही जश्न होना चाहिए।इसे मेरे सिवा कोई परिभाषित नहीं कर सकता क्योंकि एक मैं ही हूँ जो अपने भय अपनी कमियां बखूबी जानती हूँ। आप कहाँ जानते है? जो आप देखते हैं वो एक नज़र है जिसके खाँचे में मैं फिट हो जाती हूँ। मेरे लिए खूबसूरती आत्मा का ओज है ....बरसों से कायम ज्यों का त्यों... शक्ल का नहीं... संवाद का ओज अदृश्य ओज जो आपको घेरे रखे। केवल खूबसूरती से कोई नहीं बनता।उसके इतर जितनी भी जद्दोजहद है उसे झेलना खूबसूरती है। छोटी छोटी चाहनाओं में डूबे रहना कभी हारना कभी जीतना यही खूबसूरती है। जिंदगी को एक निवाला चख कर मुस्कुरा देना खूबसूरती है। प्रेम कह देना और मिलने न मिलने पर केवल अपने मन पर मरना खूबसूरती है। रो देना और बार बार लौटना खूबसूरती है। खूबसूरती सूरत में नहीं तुम्हारी अपनी खूब में है जिसे तुम चाहो तो ओज में बदल सकते हो....देह और दाह में छिपते छिपाते। *सुनो! अगर मुझे तुम खूबसूरत लगते हो तो लगते हो..... मैंने तुम्हारे ओज का रंग देख लिया है। ज़िन्दगी खूबसूरत रहे मेरी ।मेरा जश्न कायम रहे।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें