कल्पनाशब्दों के बीच
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चाहना जिजीविषा

चाहना जिजीविषा ख्वाइशें अभिलाषा लक्ष्य हमारे मन के बेताल हम पर चिपके ही रहते हैं । कहने को सब राजा हैं पर वास्तव में हम दो शाख वाले जीवित बरगद हैं ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें