भाषा / Language
भाषा की टूट
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*भाषा की टूट
और
प्रेम का मौन
एक ही है....
*हम एक झाँक में मर जाने वाले लोग हैं।
जो उस रोज़ हुआ फिर कभी न हो चाहे।
😊😊😊😊रोज़ जरा जरा जी लो.....कि जीना तो बनता है।😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें