भाषा / Language
मन की बात न सुने कोई तो कहते रहो
✦
मन की बात न सुने कोई तो कहते रहो....
जब तक मन की न हो।😊😊😊😊😊
आज covid vaccine का appointment due था मेरा। 9 से 11 am
ठीक 8.45 मैं अस्पताल परिसर में दाखिल हुई तो पाया दूसरे माले में एक बड़े से हॉल में लोग जमा हैं। सब बढ़िया set up है। डॉक्टर नर्स अटेंडेंट मैनेजर कुर्सी पंखा सोफा चाय पानी बिस्कुट सब है पर सबकी फिर भी हवाइयाँ उड़ी हुई।
पूछने पर पता चला वैक्सीन आउट ऑफ स्टॉक है।
हैरान रह गयी। मन की बात फुस्स होते हुए देखा। लोग शालीनता से प्रश्न पर प्रश्न दागे जा रहे थे। एक ही जवाब मिला आएगी तो लगेगी।
गार्ड से लेकर मैनेजर तक सबको pacify करने में लगे थे।
पर जो पब्लिक है वो सब जानती है। कुछ तो चले गए। पर हम करीब 60 लोग भिड़ गए कि यहीं बैठेंगे। जब आएगी तो लगाएंगे। घर जाओ बोलने पर भी बैठे ही रहे।
कुछ बुज़ुर्ग अंकल आंटी जी लोग भी पसर गए कि जाएंगे नहीं वापस। लोग एक भारी शब्द है और उसकी बेचैनी और शालीनता से उठते हुए धुएं को अस्पताल प्रशासन भांपने लगा। चाय और बिस्कुट आ गए। फिर एक घंटे बाद पर्ची कटने लगी । रजिस्ट्रेशन शुरू हुआ। मेरा 15 नंबर था। दस मिनट में 250 रुपये की पेमेंट हुई ।5 मिनट में वैक्सीन लगी और सर्टिफिकेट मिल गया।
एक artificial panic आँखों के सामने create हुई।
वैक्सीन out of stock की।
जबकि सब कुछ था। 2 घण्टे का तमाशा।
लोगों के कहने का असर समझें या आज का अच्छा दिन ।बिना हाथ पैर मारे कुछ न मिलता। दर्द हो तो कहो वर्ना इधर सब पगलेट बनाने को बैठे हैं।
खैर ,सबको vaccine लग गई। आते वक्त मैनेजर को धन्यवाद देकर आयी कि आपने एक बेहद कटु अनुभव के साथ नहीं भेजा। आपका सहयोग सराहनीय है।
ये अलग बात है कि कोई वैक्सीन आपको क्या बचा लेगी। आप को अपना बचाव खुद करना है। हर जगह वैक्सीन out of stock का व्यूह रचा जा रहा। चक्कर में न फंसे। जल्द लगवाएं।
सुविधा लेनी नहीं छीन कर लेनी पड़ रही । चाहे शालीनता से ही।
Happy vaccination😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें