कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 2680

भाषा / Language

खो देने के लिए तुम भी थे पर मैंने खुद को चुना।

खो देने के लिए तुम भी थे पर मैंने खुद को चुना। तुम अभी कई लोगों से प्रेम किये जाने के लिए बाकी हो। लोगों को तुम्हारे प्रेम में पड़ कर साँस आती है। मैं अपना प्रेम उगा चुकी यादों से दरख़्त बना रहेगा। सब प्रेम खत्म हो जाएं तो हम दोनों इसी दरख़्त पर सूख जाएंगे। तुम आओगे ...जानती हूँ मैं मैं यहीं हूँ। वादा रहा अधखिली कलियाँ ... पूरी खिली प्रेमिकाएं हैं।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें