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ये कितनी अच्छी बात है कि ईश्वर ने प्रेम सबको एक जितना दिया।…

ये कितनी अच्छी बात है कि ईश्वर ने प्रेम सबको एक जितना दिया। पर उसे सबने अलग अलग बरता ।अपनी अपनी ज़द देख कर । कोई बरतता रहा। कोई कम कम में ज्यादा बरत गया । कोई बरतने से पहले डर गया । कोई बरतना भूल गया। कोई बरत कर उदास हुआ। कोई बरत बरत कर मरता रहा। कोई सब में बरतने लगा। कोई रोज़ अपनी बरत बदलता रहा। कोई बरतने की चाह में रुका रहा। कोई फ़िज़ूल बरत गया। कोई एक तरफा बरत में निभता रहा । कोई बरत नकारता खप गया। कोई बरत ही डुबो जला आया। कोई बरत को चुपचाप लिखता रहा। कोई बरत को बरत के पास सुला आया। ईश्वर हर बरत देख हँसा , रोया, किलसा ,झूमा .... फिर बोला.... हाय ! इश्क़ का इतर इश्क़ का इतर शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें