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शाम बालकनी में रेंगते हुए गुजरती है। मैं खोई रहती हूं ख्याल…

शाम बालकनी में रेंगते हुए गुजरती है। मैं खोई रहती हूं ख्यालों में... इन तस्वीरों को खींचते वक़्त कोई कहानी नहीं थी। पर जब एक के बाद एक स्क्रोल कर के देखा तो मुझे दुःख सुख की घण्टियाँ और उम्मीद का सूरज चमकता ढलता मिला। तस्वीरें कितना कुछ कहती हैं। ठीक तुम्हारी तरह .... न बोलो तब भी 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें