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कभी हासिल करने की सोची ही नहीं....इसी लिए पाती चली गयी।

कभी हासिल करने की सोची ही नहीं....इसी लिए पाती चली गयी। लहर हूँ... खुद पास आती हूँ खुद दूर चली जाती हूँ... तुम्हारे साथ कोई हिसाब नहीं चलता । जब कभी मिल जाते हो ... पूरे पड़ते हो। न कम ...न ज्यादा शुक्रिया मेरे लिए प्रेम में भी एक अप्रेम बनाये रखने का। तस्वीर अभी स्कूल जाने से पहले की है कि खुद को मुस्कुराते हुए देखना नया दिन शुरू करने जैसा है मेरे लिए।😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें