कल्पनाशब्दों के बीच
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प्रेम के भुलावे भी ग़ज़ब हैं

प्रेम के भुलावे भी ग़ज़ब हैं भूल मत जाना.... बस इतने लिखे में.... हिदायत भी आग्रह भी आस भी विश्वास भी पीड़ा भी अनुराग भी अंश भी दंश भी रह भी विरह भी स्नेह भी संदेह भी मर भी अमर भी कल भी सकल भी आ भी जा भी भूल में रखा प्रेम सबसे ज्यादा फूल देता है। देखो ऊपर कितने तो फूल खिले हैं ....तुम पर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें