कल्पनाशब्दों के बीच
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आँखों तक तो ईश्वर भी सच्चा था..... मन रखते ही वो भी डोल गया

आँखों तक तो ईश्वर भी सच्चा था..... मन रखते ही वो भी डोल गया 😊😊 कल के सगरे रंग छूट छूट गए। अब जो शेष बचा है मुझ पर वही तुम्हारा है। मुझे ईश्वर और तुम सबसे पहले और आख़री ही पसंद हो। इनके बीच का अंतराल बाक़ी सब का है। मेरी memory बहुत शार्ट है। ये blessing in disguise है।मेरा मन भूलने का आदी है।मैं कम कम मन में खुश हो जाती हूँ। तुम याद रहते हो ईश्वर मुझमें बना रहता है। "दो " मेरा ढ़ेर सारा है😊 💐💐💐💐 *खुद से बोल लो सुबह सुबह तो मन काबू रहता है दिन भर😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें