कल्पनाशब्दों के बीच
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बरगद होते हैं

*बरगद होते हैं ... मौन प्रेमी एक वृक्ष का जंगल *उसने मुझे प्रेम में अपना मौन दे दिया... कैसे कहती कुछ न दिया। मैं उसकी प्रिय प्रेमिका हूँ। *जो कहा नहीं वही सब मेरा है जो रहा और बचा रहेगा वही मेरा है मैंने सीख लिया है तुमको decode करना। अब कहो ... ना भी कहो *ज्यादातर प्रेम बेमतलब सी सादी बातों में लिखा दिखेगा इस दिखे में *कविता* तय करना आँखों से ज्यादा मन के मन का काम है। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें