कल्पनाशब्दों के बीच
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आज आदरणीय नरेश सक्सेना जी की किताब के साथ शाम गुज़री। समुद्र…

आज आदरणीय नरेश सक्सेना जी की किताब के साथ शाम गुज़री। समुद्र पर हो रही है बारिश....नाम ही कितना मारक है किताब का💐💐💐 बेहद खूबसूरत किताब ... एक बार में पढ़ी गयी। किताब बीच में छोड़ने का मन न बना। एक वृक्ष भी बचा रहे,उसे ले गए,पानी,लालटेनें, पार, जूते, शिशु,फूलों का रोना,दिशाएं बेहद अध्भुत हैं। कुछ पंक्तियों में कितना सारा व्यक्त हुए आप। 😊😊😊 आपको नमन सुंदर किताब के लिए शुक्रिया Vikas Singh । कुछ बेहद प्यारी पंक्तियां साँझा कर रही। शुभरात💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें