कल्पनाशब्दों के बीच
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मुझे इल्म है वो मुझे खामोशी में रखता है।

मुझे इल्म है वो मुझे खामोशी में रखता है। ये कम है कि नीम बेहोशी में रखता है? एक दिल है तो दो प्याले फ़िज़ूल हैं कुछ इस तरह मुझे मदहोशी में रखता है जाग कर रंगता है सफ़ेदी दिल की सुबह उसी कागज़ को फ़रोशी में रखता है फूल -पत्ते ,चाँद -याद सब मैं हूँ जैसे नज़्म में तो मुझे वो गर्मजोशी में रखता है। लिख कर मिटाना मिटा कर लिखना एक नाम वो खुद से सरगोशी में रखता है।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें